पीएम मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की मुलाकात का होना ये महज संयोग नहीं, बल्कि भारत की डिप्लोमेसी की वो तस्वीर है, जो पेट्रोल-डीजल की चिंता खत्म करने वाली है।
नई दिल्ली: एक तरफ दुनिया तेल के संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की मुलाकात का होना ये महज संयोग नहीं, बल्कि भारत की डिप्लोमेसी की वो तस्वीर है, जो पेट्रोल-डीजल की चिंता खत्म करने वाली है।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
भारत में ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। वहीं, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं की ये मुलाकात सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है। माना जा रहा है कि बढ़ता भारत-वेनेजुएला सहयोग भविष्य में तेल आपूर्ति को लेकर भारत की स्थिति को और मजबूत बना सकता है।
कच्चे तेल का भारत बड़ा बाजार
विदेश मंत्रालय के पूर्वी सचिव रूद्रेंद्र टंडन ने कहा है कि वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। भारतीय अर्थव्यवस्था तेल की एक बड़ी और बढ़ती हुई उपभोक्ता है। आने वाले कई सालों तक इसकी मांग में स्थिर वृद्धि होगी। इसलिए, ऊर्जा क्षेत्र में हम एक पूर्ण पूरकता देखते हैं।

भारत को विकल्प की तलाश
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता ने भारत को वैकल्पिक विकल्पों की तलाश के लिए प्रेरित किया है। अभी तक भारत को कच्चे तेल के लिए केवल रूस और खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। लेकिन, अब वेनेजुएला के रूप में भारत के पास एक और बड़ा विकल्प मिल गया है।
सऊदी अरब और अमेरिका से बड़ा है वेनेजुएला का तेल भंडार
करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। ये भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी बड़ा है। एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे अधिक तेल सप्लाई की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अभी वेनेजुएला रूस और UAE के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है।
भारतीय रिफाइनरियों को होगा फायदा
दुनियाभर में अब ऊर्जा संकट के बीच वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति भारत दौरे पर तब है। अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद वेनेजुएला भी दुनियाभर में अपने तेल के लिए नए खरीदार की तलाश कर रहा है। दूसरी तरफ भारत भी तेल आयात के स्रोतों में विकल्प की कोशिश कर रहा है। लेकिन, वेनेजुएला के तेल के साथ एक समस्या ये है कि वो दूसरे देशों के मुकाबले मोटा होता है। इसलिए इसको प्रोसेस करना पड़ता है और भारत के पास वो रिफाइनरीज है, जो ये काम कर सकती है। इसलिए भी वेनेजुऐला को भारत की जरूरत है। भारत के लिए ये तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। वहीं, भारतीय रिफाइनरियों को भी इससे आर्थिक रूप से फायदा होगा।
अमेरिकी ढील के बाद वेनेजुएला से आने लगा तेल
अब ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसके बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। ये पहली बार नहीं है, वेनेजुएला इससे पहले भी भारत का सप्लायर रहा है।

भारत-वेनेजुएला के बीच सप्लाई बढ़ाने और रिफाइनिंग सहयोग पर बातचीत
डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी और अब उसी तरफ दोनों देश आगे बढ़ रहे है।
दोनों देशों के बीच नई साझेदारी की संभावना
रूद्रेंद्र टंडन ने कहा है कि वेनेजुएला एक बहुत बड़ा देश है। यहां न केवल ऊर्जा क्षेत्र में, बल्कि खनन, पशुपालन, परिवहन, कृषि उपकरण, ऑटोमोटिव क्षेत्र और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी अपार अवसर मौजूद हैं। इन क्षेत्रों पर चर्चा की गई। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे तरीके खोजना था, जिनके माध्यम से भारतीय व्यावसायिक संस्थाएं वेनेज़ुएला के बाजार में सफलतापूर्वक प्रवेश कर सकें और इन क्षेत्रों में एक नई साझेदारी स्थापित की जा सके।
भारतीय कंपनियों को वेनेजुएला में निवेश के मिल सकते हैं अवसर
हालांकि, इस मुलाकात का सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा सुरक्षा में ही होगा। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा करती है। वेनेजुएला के साथ मजबूत ऊर्जा संबंध भारत को एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं। इसके अलावा भारतीय कंपनियों को वेनेजुएला के तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश के अवसर भी मिल सकते हैं।